12 September 2012

इश्क पर लिखने का फैसला - आमिर


 मुझे मोहब्बत से बहुत मोहब्बत है । और इश्क के नाम से भी इश्क है । अपने बारे में सिर्फ इतना ही बताना चाहूँगा कि मैं एक गरीबुल वतनी हूँ । यानी मैं भारतीय होकर भी अपने वतने अज़ीज़ भारत से दूर दुबई में हूँ । यहाँ एक कम्पनी में मैंनेजर की पोस्ट पर कार्यरत हूँ । लिखने का शौक बचपन ही से रहा है । जब सबने ये मशवरा दिया कि - अच्छा लिखते हो । तो शेयर क्यों नही करते ? .लेकिन अब भी मुझे नहीं लगता कि - मैं कोई अच्छा लेखक बन पाया हूँ । बस आदतन लिख लिया करता हूँ । इश्क के बारे में लिखने का जब फैसला लिया । पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका था । मैंने तो सिर्फ ये कोशिश की कि उर्दू भाषा में कुछ लिख कर उसे हिंदी में सब तक पहुंचाऊं । और मेरी भाषा उर्दू बोलने में और हिंदी लिखने में दोनों ही रही है । और मैं कमेंटस और टिप्पणी पर यकीन नही रखता । मेरा मानना है कि कोई कमेंटस करे । या ना करे । आप अच्छा लिखते रहें ।.लोग उसे पढ़ते हैं । यही उनका प्यार है । मै तो इसी पर खुश हूँ कि लोग मेरे कलम को पढ़ते हैं । और पसंद करते हैं । तारीफ़ नहीं करते । तो बुराई भी तो नही करते । और इनके ब्लाग है - मोहब्बत नामा एक ब्लाग सबका मास्टर्स टेक टिप्स । ब्लाग के नाम पर क्लिक करें ।

2 comments:

UMA SHANKER MISHRA said...

http://ujbakvani.blogspot.in/




कृपया मेरे ब्लॉग को ब्लॉग वर्ल्ड में शामिल करने की
कृपा करें
UMASHANKER.MISHRA

UMA SHANKER MISHRA said...

आदरणीय
मै उमाशंकर मिश्र
मै व्यंग लेख लिखता रहा हूँ परन्तु कुछ दिनों से ओ.बी.ओ के सानिध्य में
कविता लिख रहा हूँ
मै बैंक में कार्यरत हूँ
मुझे १९९४ में ११ लोगों कि जान बचने के लिए
दुर्ग जिले के तात्कालिक जिलाधीश के द्वारा एवं एस.बी.आई.के पूर्व एम्.डी.श्री संगीत शुक्ला के द्वारा सम्मानित किया गया था . २००७ में गृह मंत्रालय द्वारा मनोनीत राजभाषा विभाग द्वारा दुर्ग भिलाई द्वारा सर्वश्रेष्ठ राजभाषा अधिकारी का अवार्ड प्रदान किया गया था
भारतीय स्टेट बैंक रायपुर अंचल द्वारा २०१२ में मुझे उत्कृष्ठ अधिकारी का अवार्ड प्रदान किया गया मेरी अनेक रचनाएँ एस.बी.आई. की गृह पत्रिका में छपती रहती है मेरी रचनाओं को कई बार पुरस्कृत किया जा चुका है. प्रवाह, आकांक्षा , प्रयास, कलीग आदि पत्रिकाओं में मेरी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं अभी अगस्त २०१२ में ओपन बुक ऑन लाईन साईट द्वारा आयोजित चित्र काव्य प्रतियोगिता में मुझे प्रथम स्थान प्रदान किया गया
मेरे पिता स्व.श्रीपाल मिश्र भूतपूर्व सैनिक थे
सेना से सेवा निर्वित होने के उपरांत वे बैंक में कार्य करने लगे. १९८३ में बस्तर जिले में यात्रा के दौरान वे जिस बस में बैठे थे उसका ब्रेक फेल हो गया बस घाटी कि ढलान में था,बस ड्राईवर कूद गया और मेरे पिता श्रीपाल मिश्रा बस को सम्हालने के प्रयास में शहीद हो गये परन्तु उन्होंने अपने प्रयास से बस में सवार ५२ यात्रियों की जान बचाली.परन्तु मेरे पिता की मौत की खबर गुमनामी में खो गयी मै अपने पिता का अनन्य भक्त हूँ
आपके द्वारा एक दिन पूर्व मेरा परिचय प्रकाशित किया गया था मै आपका आभारी हूँ मै ब्लॉग वर्ल्ड से जुड़े तमाम साहित्य प्रेमी बंधु एवं ब्लॉग सदस्यों का शुक्रिया अदा करता हूँ विशेस तौर पर आदरणीय अरुण निगम जो स्वयं छत्तीसगढ़ भाषा को नयी दिशा देने वाले प्रख्यात कवि स्व. कोदूराम दलित जी के सुपुत्र हैं मै उनका तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मुझे ब्लॉग वर्ल्ड की खूबियों से परचित कराया
आभार

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