25 April 2012

कृष्णा आला रे - विजय कुमार मिश्रा

महा मूर्ख दरबार में । लगा अनोखा केस । फँसा हुआ है मामला । अक्ल बङी या भैंस । अक्ल बङी या भैंस । दलीलें बहुत सी आयीं । महा मूर्ख दरबार की । अब देखो सुनवाई । जी हाँ । ये कहना है इनका । इनका शुभ नाम है - विजय कुमार मिश्रा । इंटरनेट पर धार्मिक लोगों की खोज करना । उनसे जुङना । विचारों का आदान प्रदान करना ही मेरा एकमात्र ध्येय है । इसलिये ऐसे लोगों के मिलने पर खुशी होती हैं आज हम आपका परिचय करा रहें हैं । ऐसे ही एक श्रेष्ठ भारतीयता के विचारों से ओत प्रोत नवयुवक श्री विजय कुमार मिश्रा जी से । हालांकि मुश्किल ये है कि - विजय जी ने अपने परिचय प्रोफ़ाइल में खास क्या कुछ भी नहीं लिखा है । पर किसी व्यक्ति के विचार ही उसका परिचय होते हैं । विजय जी ने सनातन हिन्दू धर्म । धार्मिकता । और कई अन्य ज्ञानवर्धक विषयों पर पूर्ण बेबाकी और निडरता से लिखा है । इसलिये इन्हें पढने से हमें बहुत सी नामालूम चीजों का भी पता चलता है । और एक रोचकता पूर्ण अहसास का अनुभव करते हुये पाठक इन्हें पढता ही चला जाता है । इनका ब्लाग है - कृष्णा आला रे । ब्लाग के नाम पर क्लिक करें ।

2 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...!

Anonymous said...

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