11 February 2012

भोगी भोग्या भोग यही है प्रेम रोग - आशा सक्सेना

इनका शुभ नाम  है - आशा सक्सेना । आशा जी ने अपने परिचय में कुछ नहीं लिखा है । लेकिन अपना माँ जी के परिचय में लिखती हैं - हमारी माँ डॉ. श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना ' किरण ' साहित्यलंकार । साहित्य रत्न । M.A. L.L.B. एक अत्यंत विदुषी । संवेदनशील तथा सामाजिक सरोकारों के प्रति पूर्णत: समर्पित एवं सजग रचनाकार । जिन्होंने साहित्य की हर विधा पर सफलता पूर्वक अपनी कलम चलाई । आशा जी हिन्दी अंग्रेजी दोनों में ही लिखती हैं देखिये इनकी कविता के कुछ अंश - जो दिखाई दे वह होता नहीं । जो होता वह दीखता नहीं । बादलों की ओट से । हल्की सी झलक दिखा जाता ।.. है आस तभी तक । जब तक उल्टी गिनती शुरू न हुई । बाद में क्या हश्र हो । लौट कर किसी ने बताया नहीं । और भी देखिये - प्रेम की है परिभाषा ।  आज के सन्दर्भ में । भोगी भोग्या और भोग । बस यही है प्रेम रोग । सुंदरता  का पैमाना । प्रेम ने नहीं माना । जो  केवल मन भाया । अपना उसे बना पाया । और अंग्रेजी में - The bell rings  children welcome Santa  with  a bag  full of gifts  all say  happy x-mas to you  और इनके ब्लाग हैं - आकांक्षा । CYPRESS । अमृत कलश । इनके ब्लाग पर जाने हेतु क्लिक करें ।

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