04 January 2012

कबीर की यह कतई मंशा न थी - शालिनी पाण्डेय

Education इण्डस्ट्री से जुङीं शालिनी पाण्डेय जी Occupation से प्राध्यापिका । श्रीमती जे. देवी महिला पी. जी. कॉलेज । बभनान । गोण्डा और Location बभनान । गोण्डा । उत्तर प्रदेश India से हैं । इनके ब्लाग से मेरा परिचय कबीर साहब के इस लेख द्वारा हुआ । शालिनी जी लिखती हैं - कबीर मात्र भक्तिकाल के सहज तथा जमीनी भक्त कवि ही नहीं थे । वरन एक बड़े समाज सुधारक भी थे । उन्होंने जाति पाँति का विरोध कर एक समरस, आडम्बर हीन, सर्वतोभावेन सुखी और समुन्नत मानव समाज का आदर्श दिया । उन प्रत्येक महानतम प्राप्तियों तथा प्रतिमानों को, जो केवल जातिगत आधार पर उच्चवर्गियों की थाती समझी जाती थीं । और जिनका अनुचित तथा सर्वाधिक लाभ उस विशेष वर्ग या जाति के आडम्बरी और अयोग्य ही उठा पा रहे थे । कबीर ने प्रत्येक वर्ग के कर्मनिष्ठ, योग्य और अधिकारी व्यक्तियों के लिए सुलभ बना दिया । यद्यपि दलित वर्गों के कतिपय अज्ञानी, धूर्त और आततायी कबीर की भ्रामक व्याख्या करके उस आड़ में बड़बोलेपन से अमानुसिक एवं उच्छृंखलतापूर्ण अभद्र कृत्यों को कर रहे हैं इनके  ब्लाग - हिन्दी भाषा और साहित्य बेसुरम

1 comment:

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