14 November 2011

मैं कवि बन रवि पर लिख दूंगा - योगेश "योगी"

इनका शुभ नाम है - योगेश वैष्णव "योगी" । योगी जी Government service के Occupation में सरकारी सेवारत हैं । और इनकी Location यानी निवास स्थान है - जोधपुर । राजस्थान । भारत । India । योगेश वैष्णव "योगी" जी अपने बारे में कहते हैं - ईश्वर से मुझे कवि होने का वरदान मिला है । कविता लिखना सहज नहीं है । पूछो हम फ़नकारों से । हम सब लोहा काट रहे है । कागज की तलवारों से । KBC 1 के समय लिखी इनकी रचना  - रोजाना की तरह जब होने लगी शाम । तो टी वी पे आने लगा एक प्रोग्राम । KBC यानि कौन बनेगा करोड़पति । जिसको देखते है श्रीमान  बच्चे और श्रीमती । सबकी आँखों में एक ही सपना । करोड़ का इनाम हो जाये अपना । हमारे पडोसी मिस्टर ग्वाला । हमसे बोले लाला । जो ये इनाम लग जाये करोड़ वाला । बने हमारी जीवन संगिनी युक्तामुखी बाला ।..और पिता पर लिखी गयी रचना - मैं कवि बन के रवि पर लिख दूंगा । ये तो मेरी कीमत  है । पर पिता पर क्या छंद लिखूंगा । जो कि मेरी हिम्मत है ।  इनका ब्लाग है - शुभंकर । ब्लाग पर जाने हेतु यहाँ क्लिक कीजिये ।

6 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।
बालदिवस की शुभकामनाएँ!

G.N.SHAW said...

yogi जी के परिचय के लिए आभार
! राजीव जी -मेरे ब्लॉग का लिंक बदल गया है !अतः अपडेट इस पर उधृत नहीं हो रहा है ! मेरा नया लिंक है -
www.gorakhnathbalaji.blogspot.com
www.gorakhnathomsai.blogspot.com
www.gorakhnathramji.blogspot.com
please refresh it. Thanks .

Anonymous said...

I need to say, as very much as I enjoyed reading what you had to express, I couldnt support but lose interest following a while. Its as should you had a good grasp on the subject matter matter, but you forgot to include your readers. Perhaps you should think about this from more than one angle. Or perhaps you shouldnt generalise so much. Its far better if you take into consideration what others may have to say rather than just going for the gut reaction for the theme. Consider adjusting your own thought procedure and giving other people who may study this the benefit of the doubt.

Anonymous said...

so heissen sie Perlgerste,

Anonymous said...

wie dies beim Reis und bei den Graupen der Fall,

Anonymous said...

Hi would you mind letting me know which web host you're working with? I've loaded your blog in 3 different browsers and I must say this blog loads a
lot faster then most. Can you suggest a good hosting provider at a fair price?
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