26 September 2011

मन प्रसन्न रहता है - अनुपमा त्रिपाठी

उर में है यदि आग लक्ष्य की । पंथ स्वयं आयेगा । यही भाव से माँ शारदा की आराधना कर । मन पर इंगित भावों को व्यक्त कर । मन शांत एवं हल्का रखने के लिए लिखती हूँ । या आपसे कुछ बाँटना चाहती हूँ । ये कहना है । मुम्बई । महाराष्ट्र । भारत में रह रहीं अनुपमा त्रिपाठी जी का । learning classical music से जुङी अनुपमा जी को अपनी सभ्यता और संस्कृति से जुड़े रहना बेहद पसंद है । इनके विचार निसंदेह ही प्रेरक हैं । आईये देखें । अनुपमा जी अपने बारे में  कहती हैं - M.A ( अर्थशास्त्र ) में किया । महा विद्यालय में 1 वर्ष पढाया । आकाशवाणी में गाया । फिर सब त्याग गृहस्थ जीवन में लीन हो गयी । अभी भी लीन हूँ । किन्तु फिर भी कुछ रह गया था भीतर । जो उदगार पाना चाहता था । जब से गाने लगी हूँ । लिखने लगी हूँ । मन प्रसन्न रहता है । अपनी सभ्यता और संस्कृति से जुड़े रहना मुझे बहुत पसंद है । इसी प्रयास में सतत रहती हूँ । सच्चाई और अथक प्रयास से जो मिले । वही ईश्वर का प्रसाद समझ ग्रहण करती हूँ । इस छोटे से जीवन में कुछ छाप छोड़ सकूँ । यही अभिलाषा है । इनका ब्लाग - अनुपमा’ज सुकृति

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