24 September 2011

स्त्री.. वैश्या से राधा बन जाती है - लीना मल्होत्रा ।

हौजखास । दिल्ली । भारत में रह रही सरकारी नौकरी में सेवारत लीना मल्होत्रा जी का खास और बेबाक अन्दाज है । उनकी कविताओं में कल्पनाओं की मधुर उङान नहीं । बल्कि भोगा हुआ यथार्थ है । जो मानवीय दैहिक रिश्तों स्त्री पुरुष के सम्बन्धों में पैदा हुयी तल्खी का सटीक सचित्र अहसास कराता है । देखिये इन मार्मिक पंक्तियों को - तभी जान पाई मै कि क्या अर्थ होता है ज़ायका बदल लेने का । और विवाह के बाद के प्रेम में कितना सुख छिपा होता है ।.. वैसे अक्सर मैं ब्लागर कवियों कवियित्रियों की कविता झेल नहीं पाता । और कविता में मेरी विशेष रुचि नहीं है । पर लीना जी की इस कविता को मैंने तीन बार पढा । ऐसा लगा । एक स्त्री को अवला का झूठा बनाबटी चोला । जो उसे जबरन पहनाया गया है को उतारकर एक चुनौती सी देती हुयी झूठे अहंकारी पुरुष को उसकी असली औकात बता रही हो । वास्तव में लीना जी की अभिव्यक्ति लाजबाब है । लीना जी अपने बारे में कहती हैं - संवेदनायें ही मेरी धरोहर हैं । और कविता मेरे लिए कोई चर्चा का विषय नहीं । बल्कि अनुभूतियाँ हैं । जो मेरी रूह में बसती हैं । इनका ब्लाग - अस्मिता

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