24 August 2011

तड़पे हिया आ जाओ पिया - डा. सुशीला गुप्ता

भूल न पाऊँ तेरे होठ । भूल न पाऊँ तेरी  सूरत । बस गये ऐसे दिल में मेरे । जैसे मंदिर में मूरत.. ऐसे भाव भीने विचारों वाली लखनऊ U.P की निवासी डा. सुशीला गुप्ता जी अपनी मधुर मुस्कान से सहज ही आकर्षित करती हैं । आनेस्टी को ही बेस्ट पालिसी मानने वालीं और भगवान में पूरी पूरी श्रद्धा विश्वास रखने वाली सुशीला जी शायद हमारे बीच नयी नयीं ही आयी हैं । कम से कम मैंने तो उन्हें अभी अभी थोङे दिन से ही देखा है । उनकी कविता मानों सरलता से स्वतः ही ह्रदय से निकलती हैं । और दिली भावों को शब्दों की माला में पिरो देती है - ये जो तुम्हारी खामोशी । आँखों में छाई मदहोशी । जाने क्यूँ मुझे तड़पाती है । कुछ खोने को उकसाती है । बरबस  ही । पास बुलाती  है । और एक सुन्दर भाव गीत बन उठता है । सुशीला जी अपने बारे में कहती हैं - I am Dr.Sushila Gupta M.A., Aacharya , Ph-d and Writer..Poem, Gazal , Stories , Articles ( Struggle for lecturership) ) i think that honesty is the best policy I believe only God इनके ब्लाग - मेरे सपने मेरे गीतडा. सुशीला

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