24 July 2011

मैं विद्रोही प्रवृति का इंसान हूँ - अवनीश सिंह

मैं मानव महासागर में एक तुच्छ बूँद हूँ । पर पता नहीं क्यों । अपनी तुच्छता स्वीकारने में कठिनाई होती है । जन्म से आज़मगढ़ जिले के एक छोटे से कसबे में पला-बढा हूँ । प्रारंभिक शिक्षा भी यहीं प्राप्त की । वर्तमान में आगरा में संगणक अभियांत्रिकी से अध्ययनरत हूँ । साहित्य,इतिहास अध्यात्म में रूचि है । जानने वाले कहतें है - विद्रोही प्रवृति का इंसान हूँ । यही मेरे व्यक्तित्व का सम्बल और कमजोर पक्ष दोनों है । मैं चिंगारी दबाने की जगह उसे हवा देकर हरेक सामाजिक,पारिवारिक व्यक्तिगत व्यवस्था में एक क्रांति लाने का विचारक हूँ । जो दोगली विचारधाराओं पर आधारित है । मैं स्वदेशी और मातृभाषा का प्रबल समर्थक हूँ । व्यक्तिगत जीवन में भी इस विचार का अनुकरण करने का प्रयास करता हूँ । मेरा मानना है कि यदि व्यवस्था बदलनी है । तो उसका हिस्सा बनना ही होगा । जीवन के हर एक पल को जीने में यकीन रखता हूँ । जिंदगी बहुत ही छोटी है । इसलिए जितना संभव हो । प्यार बाँटने की कोशिश करता हूँ । अनकही भावनायें व्यक्त करने के लिये कविता या लेखों को माध्यम बना लेता हूँ । इनका ब्लाग - विमर्श

7 comments:

शिखा कौशिक said...

very nice post Rajeev ji .

Er. सत्यम शिवम said...

wish for ur bright future...:)

शालिनी कौशिक said...

बहुत खूब राजीव जी .सराहनीय प्रयास .आभार

"पलाश" said...

सुन्दर प्रयास
http://aprnatripathi.blogspot.com/

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Cependant la malade fut prise de retention

Anonymous said...

a entrelazarse con el concepto del progreso,

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