25 June 2011

ज़िन्दगी भी एक किताब सी है - निधि टंडन

लखनऊ उत्तर प्रदेश की डा. निधि टंडन जी संस्कृत में शोध करने के बाद कुछ वर्ष महाविद्यालय में पढ़ा चुकी हैं । जब तक वे अपने मन के भावों को लिखती नहीं हैं । उन्हें चैन नहीं मिलता है । उनके अनुसार - ज़िन्दगी भी एक किताब सी है । जिसमें ढेरों किस्से कहानियां हैं । इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं । तो कुछ में ख़ुशी मुस्कुराती है । प्यार है । गुस्सा है । रूठना मनाना है । सुख दुख हैं । ख्वाब हैं । हकीकत भी है ।... उनका मानना है कि लिखना एक तरह से नव शिशु को जन्म देना है - लिखने में प्रसव सी पीड़ा होती है । जब तक अंतस में विचारों के कोलाहल को शब्दों में बाँधकर उसमें जीवन का संचरण कर कागज़ पर नहीं उकेर देती । चैन नहीं मिलता है । अपने विषय में लिखने की बात पर शब्द जैसे साथ छोड़ देते हैं । जीवन की इस यात्रा के 35 वसंत देख चुकी हूँ ।...फ़िर भी वे हर - रोज अपने में कुछ नया ढूंढ लेती हूँ । अभी तो मेरा खुद से भी कायदे से परिचय नहीं हो पाया है । हाँ लिखने पढ़ने का शौक है । संस्कृत में शोध करने के बाद कुछ वर्ष महाविद्यालय में पढ़ाया । फिर छोड़ दिया । आजकल गृहिणी हूँ । अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश । ब्लाग - ज़िन्दगीनामा

7 comments:

शालिनी कौशिक said...

nidhi ji se milvane ke liye aabhar.
Rajiv ji kripya dhayan den,
''ye blog achchha laga par koi aap ki aur se prastuti de raha hai mujhe to lagta hai kisi ne aap ko aaina dikhane ki thani hai.kripya is aur dhyan den aur jald se jald koi karyavahi karen.

शिखा कौशिक said...

very nice post and very nice blog .

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

एक नये प्राणी से परिचय कराने का आभार, अच्छा लगा इनके बारे में जानकर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

निधि जी से परिचय करवाने के लिए धन्यवाद!

Anonymous said...

Hi.. very informative post.

Anonymous said...

verschiedenen Mehlsorten differirt.

Anonymous said...

andern Orte zur Sprache kommen,

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