20 May 2011

दुनिया की रीत निराली है । प्रेरणा

प्रेरणा जी की बात ही निराली है । इनके ब्लाग का नाम ही स्वागत है । अतः मैं इनके ब्लाग पर गया । तो इन्होंने मेरा जोरदार स्वागत किया । अरे भाई ! वही चाय । बिस्किट । नमकीन । छेने के रसगुल्ला एन्ड रसमलाई etc अतः मेरे जैसा मुफ़्त खाऊ तो बारबार ही इनके ब्लाग पर जायेगा । मुफ़्त में प्रेरणादायक रचनायें पढो । और स्वागत भी मुफ़्त में । देखिये प्रेरणा जी क्या कहती हैं - मैंने अपने दिल के उदगार और भावों को अपनी स्वरचित कविताओं में प्रस्तुत किया है । आशा है । आप सबका आशीर्वाद प्राप्त होगा । स्वागत है ।...बात बस इतनी ही नहीं है । आगे प्रेरणा जी इस अजब दुनिया के गजब खेल बता रहीं हैं -दुनिया की रीत ही निराली है ।  किसी को फूलों का हार । किसी को देती गाली है ।  अमीरों को झूक कर सलाम करती है ।  भूखे  गरीब बच्चे की तरबूज चोरी पर जान ले लेती है । स्वार्थी ,मतलब से परिपूर्ण दुनिया हो रही है । दुख दर्द ,भावनाओं से विहीन,पैसों की गुलाम हो रही है । गरीबों की कहीं नहीं सुनवाई । अमीरों की बेवजह वाहवाही । गरीब जब सब तरफ से परेशान हो जाते हैं । तो विद्रोह पर उतर आते हैं । ब्लाग - स्वागत

7 comments:

दर्शन कौर धनोए said...

बहुत दिनों बाद इधर से गुजरी हूँ ..अच्छा परिचय किया है ..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

प्रेरणा अर्गल जी बहुत अच्छा लिखती हैं!
मेरी शुभकामनाएँ!

Kailash C Sharma said...

शुभकामनायें!

ana said...

शुभकामनायें
kavyana.blogspot.com

Anonymous said...

Before reading this article, I had exactly the same problem, now I know that you can solve it, thank you very much for your help!

Anonymous said...

En muchos pueblos de Mexico he visto lo que,

Anonymous said...

bis die ganze Teigmasse durch und durch

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