19 March 2011

ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है । जेन्नी शबनम

मुझे याद है । मैंने एक बार जेन्नी शबनम जी से कहा था । आपकी कवितायें अनोखी ही हैं । और आपका नाम बङा अजीव है । इस पर जेन्नी जी ने कहा था ।..मेरा नाम अजीब है । इसीलिये मेरी कवितायें भी अजीब यानी अनोखी हैं । मैं जो भी लिखती हूँ । गहरे डूबकर लिखती हूँ । देखिये आगे । उनकी कविता के एक नायिका के भाव.. कभी अग्नि बनकर । जो उस रात दहक रही थी । और मैं पिघल कर । तुम्हारे सांचे में ढल रही थी । और तुम इन सबसे अनभिज्ञ । महज़ कर्त्तव्य निभा रहे थे । ( और भी देखिये )..कभी फूलों की ख़ुशबू बनकर । जो उस रात । तुम्हारे आलिंगन से । मुझमें समा गई । और रहेगी । उम्र भर ।  ( और ये भी ) ..तुम कहते हो । अपनी कैद से आज़ाद हो जाओ । बँधे हाँथ मेरे । सींखचे कैसे तोडूँ ? ( और एक इच्छा )..कभी धरा बनकर । जिसकी गोद में । निर्भय सो जाती हूँ । इस कामना के साथ कि । अंतिम क्षणों तक । यूँ हीं आँखें मुँदी रहूँ । तुम मेरे बालों को । सहलाते रहो । और मैं सदा के लिए सो जाऊँ । ( आत्मकथ्य ) ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है । जो प्रतिपल मन में उपजता है । ब्लाग..लम्हों का सफ़र

11 comments:

: केवल राम : said...

आदरणीय जेन्नी शबनम जी का लेखन अनवरत रूप से जारी रहे यही कामना है ...आपका आभार

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

जेन्नी शबनम से मिलवाने के दिए शुक्रिया!
--
आप सभी को और आपके पूरे परिवार को रंगों के पर्व होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

Er. सत्यम शिवम said...

जेन्नी शबनम जी बहुत ही सुंदरता से अपने विचारों को शब्दों में गढ़ती है..बहुत ही प्रभावशाली है उनका लेखन...बधाई और शुभकामनाएँ....आपको और आपके पूरे परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ...

शिखा कौशिक said...

bahut shandar prichay raha Jenni ji ka .aapko v samast blog privar ko Holi ki shubhkamnayen .

sandhya said...

प्रभावशाली के लिए लेखन...बधाई और शुभकामनाएँ....आपको और आपके पूरे परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ...

Roshi said...

aapka blog dekha accha laga

Dr Varsha Singh said...

जेन्नी शबनम जी के बारे में जानकारी देने हेतु आभार....

दर्शन कौर धनोए said...

जेबी जी से मिलवाने का शुक्रिया राजीव जी !

Anonymous said...

Could you write another post about this subject simply because this post was a bit difficult to comprehend?

Anonymous said...

lorsque le membre etait etendu.

Anonymous said...

Le malade fut place dans les salles de medecine,

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