11 March 2011

इंसानियत का तलबगार हूँ । खुशदीप सहगल

इनके ब्लाग का सिर्फ़ नाम ही " देशनामा " है । पर श्री खुशदीप जी विश्व की खबर रखते हैं । सिर्फ़ एक इंसानियत को ही धर्म मानने वाले खुशदीप जी दिल से भावुक सीधे सच्चे इंसान और भावनाओं के स्तर पर जजबाती  हैं । ब्लाग जगत के जाने माने हस्ताक्षर खुशदीप जी अपनी विचार क्रान्ति से ब्लाग जगत को समृद्ध करके अपना भरपूर योगदान दे रहें हैं । मेरा मानना है कि मनुष्य खुद को देवता बनाने के बजाय अगर खुशदीप जी जैसी विचारधारा का इंसान भी बना रहता है । तो यही बहुत बङी बात है ।..आईये देखें । श्री खुशदीप जी अपने विचार किस तरह व्यक्त कर रहें हैं ।..बंदा 16 साल से कलम-कंप्यूटर तोड़ रहा है । ( और वो इसलिये कि ) इंसानियत का जो जज्बा जगाए । ऐसी हर चीज़ का मैं तलबगार हूँ । ( आगे..खुशदीप जी की लाख बल्कि करोङ टका की ये बात लोगों को समझ में क्यों नहीं आती । जबकि यही विचारधारा मेरी भी है । ).. देश का कोई धर्म, जात या नस्ल नहीं । तो फिर यहाँ रहने वाले किसी पहचान के दायरे में क्यों बांधे जाएं । blog..देशनामा  स्लाग ओवर
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