02 March 2011

वह जीवन क्या जिसकी कोई कहानी न हो.जी एन शा


उन आँखों का हँसना भी क्या..जिन आँखों में पानी ना हो । वो जिंदगी जिंदगी नहीं जिसकी कोई कहानी ना हो । जी हाँ यही मानना है । श्री जी एन शा जी का । जो इस जीवन रूपी यात्रा में जाने कितने मुसाफ़िरों को उनकी मंजिल तक पहुँचा चुके हैं । और इसीलिये श्री शा जी जिंदगी को बेहद करीब से छूते हुये गुजरते हैं । प्रेरणादायी । परिश्रमी । भृष्टाचार रहित । समय का पाबन्द और अनुशासित होना ही उनका सिद्धांत है । इसी प्रकार की । सत्य पर आधारित..सत्य घटनायें । उनके ब्लाग्स पर मिलती है ।..मैं तो डर गया भाई । शा जी तो बहुत कङक हैं । मैं सोच रहा था । मस्का मार के..फ़्री रेल जर्नी..बट ही इज तो..करप्शन लैस मेन । एन्ड सेयस..I like discipline in all corner of life and society.Respect all good did and good people.Protest all evils.Hi please go through my all pages and enjoy.Thank u.Have a good moment..Is life more than water,air and fire ? वह जीवन..जीवन ही क्या जिसकी कोई कहानी न हो । बालाजी ओम साईंरामजी एम्प्लायमेंट ।

4 comments:

mridula pradhan said...

प्रेरणादायी । परिश्रमी । भृष्टाचार रहित । समय का पाबन्द और अनुशासित होना ही उनका सिद्धांत है ।
wah.is se achcha aur kya hoga.

Sawai Singh Raj. said...

मे रा ब्लॉग "AAJ KA AGRA" को भी अपने इस प्रयास में शामिल कर लेंना जी
मेरा ब्लॉग का लिंक्स दे रहा हूं!
http://rajpurohitagra.blogspot.com/

दर्शन कौर धनोए said...

राजीव जी के इस ब्लाक के जरिए हमे नित नए व्यक्तियों का परिचय मिलाता हे ..आज हमे जिस शख्सियत से आपने मिलवाया उनका कोई सानी नही वो लाजबाब हे....
श्री जी.ऍन शा साहब आपको बधाई |

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

ahut achha laga is parichay se milkar .....rajiv ji aabhar aapko ..

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