21 February 2011

बालमन बुजुर्ग कवि..कैलाश सी शर्मा

जीवन के खट्टे मीठे अनुभवों से परिपक्व होने के बाद भी श्री कैलाश जी के मन में " बच्चों का कोना " भी है । जहाँ एक सरल ह्रदय निष्कपट मासूम बच्चा कैलाश पंख होने पर..आसमान में उड़कर जाता, बादल को छूकर आ जाता  . सुबह नाश्ता घर पर करता, नानी के घर खाना खाता..जैसे बालसुलभ मनोहर भाव व्यक्त करता है । वहीं कैलाश जी के अन्दर एक कवि भी है । जो अपने आसपास की चीजों  से व्यथित होकर " कशिश " में अपनी वेदना आदि भावों को..My Poetry द्वारा व्यक्त करता है ।..यमुने कैसे  देखूँ तेरा  यह वैधव्य  रूप , मैंने तुमको प्रिय आलिंगन में देखा है ।कैसे यमुने तेरे  नयनों मैं जल देखूँ , मैंने इनमें खुशियों का यौवन देखा है ।..आईये देखें कैलाश जी क्या कह रहें हैं ।..अश्रु क्या है ? दर्द की मुस्कान है । पीर क्या है ? प्यार का प्रतिदान है । जी रहे हैं सब । जीने का अर्थ जाने बिना । ज़िन्दगी क्या है ? मृत्यु का अहसान है ।..प्रयास है । जुड़े रहने का बच्चों से । जो देते हैं । प्रेरणा जीने की । 

17 comments:

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

कैलाश जी मुझे खेद है । आपके ब्लाग जोङना मेरे ध्यान से उतर गया होगा । इत्तफ़ाकन आज आपका ही
परिचय प्रकाशित होना था । सो कल आपके ब्लाग का अवलोकन करते समय मुझे भी लग रहा था कि ये ब्लाग शायद नहीं जुङे । पर मैटर तैयार करने में फ़िर भूल गया । खैर 1st लाइन में आपके दोनों ब्लाग एड हो गये हैं ।

ZEAL said...

कैलाश जी एक बेहतरीन व्यक्तित्व के धनी कवि हैं ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

कैलाश चन्द्र जी वाकई में बालमन के कवि है!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

ब्लॉगवर्ल्ड में हमारे भी ब्लॉग शामिल कर लीजिए मान्यवर!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

ब्लॉगवर्ल्ड में हमारे भी ब्लॉग शामिल कर लीजिए मान्यवर!

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

शास्ती जी आपके सभी ब्लाग आपकी पहली ही टिप्पणी से भी पहले ही शामिल
कर लिये थे । सिर्फ़ ब्लाग मंच और चर्चा मंच नये अड्रेस पर कई बार सेव करने के बाद भी
पुराना रिजल्ट दे रहा है । एड करने के साथ ही ब्लाग वर्ल्ड के ही लिंक
से मैंने आपके सभी ब्लाग खोलकर भी चेक किये थे । आपने शायद ठीक से नहीं
देखा । सभी ब्लाग जुङें हैं । बाल चरचा मंच । पल्लवी ब्लाग मंच अमर भारती चर्चा मंच पहली लाइन
उच्चारण मयंक शब्दों का दंगल तीसरी लाइन

सुशील बाकलीवाल said...

श्री कैलाशजी के इस कवि मन से ब्लाग जगत के अधिकांश पाठक अभिभूत हैं । आभार व शुभकामनाएँ...

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

कैलाश जी से मिलकर अच्छा लगा !

Kailash C Sharma said...

धन्यवाद और आभार ...

http://sharmakailashc.blogspot.com/
http://bachhonkakona.blogspot.com/

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

achha laga kailash ji ko jankar ....aabhar

Swarajya karun said...

ब्लागरों की परिचय - माला एक स्वागत योग्य पहल है. आपको बहुत-बहुत धन्यवाद .

Anonymous said...

thanks, enjoyed the article

Anonymous said...

a los morituri bien manejados.

Anonymous said...

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Anonymous said...

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