18 February 2011

मैं रहूँ, न रहूँ -यह रहेगा सदियों तक ।

ब्लागवुड के अमिताभ बच्चन । उङनतश्तरी पर पूरे ब्लाग वर्ल्ड का भृमण करते हुये..हर नये पुराने ब्लागर्स को टिप्पणी की बरसात से प्रोत्साहित करने वाले लाल और बवाल के लाल याने श्री समीरलाल जी अपने सरल और सधे अंदाज में..जीवन के अनुभवों को करीब से छूते हुये दिखाई देते हैं । बङप्पन रहित..हर खास या आम को..उसके बीच घुलमिल कर उसी के जैसा खुद भी होने का अहसास दिलाना समीर जी की खूबी है । जिसके चलते वो हर खास आम के बीच में " लोगप्रिय " हैं । एकाउन्टिंग के सलाहकार होने के साथ साथ हर ब्लागर की इंटरनेट या कम्प्यूटरी समस्या का यथासंभव समाधान करने वाले समीर जी देखिये किस  तरह अपने विचार व्यक्त कर रहें हैं ।..मैं रहूँ । न रहूँ । यह उपस्थित रहेगा सदियों तक । किसी न किसी रुप में ।..मेरी कहानी । बढ़ती है हवा के साथ । झूमती है । लहलहाती है । और । फिर । चढ़ना शुरु कर । अमरबेल की तरह । न जाने कैसे । एकाएक खत्म हो जाती है । अहसास कराती कि । कोई अमर नहीं होता । कहानी भी नहीं । कभी मनचाहे तो कभी अनचाहे, उभर ही आयेंगे मेरे दर्ज विचार किसी न किसी स्क्रीन पर. तब भी देख सकोगी तुम इसे 
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