16 February 2011

संगीता स्वरुप " गीत " । ब्ला. परि. । 8

बेहद मधुर मुस्कान..सौम्य मुखमंडल..सभी के प्रति स्नेहभाव वाली संगीता जी का परिचय बताना । एक तरह से पागलपन ही होगा । क्योंकि शायद ही कोई होगा ? जो उनसे और उनके गीतों से परिचित न हो ।..पर हाल ही में संगीता जी एक प्यारे से बच्चे की दादी बनी है । अतः समस्त ब्लाग जगत की ओर से " बेटू " के लिये ढेरों ढेरों शुभकामनाओं के साथ..देखिये संगीता जी अपने मन की बात कुछ यूँ बता रही हैं... खलिश होती है । तो यूँ ही बयां होती है । हर शेर जैसे सीप से निकला हुआ मोती है ।...कुछ विशेष नहीं है । जो कुछ अपने बारे में बताऊँ । मन के भावों को कैसे सब तक पहुँचाऊँ । कुछ लिखूं या फिर कुछ गाऊँ । चिंतन हो जब किसी बात पर । और मन में मंथन चलता हो । उन भावों को लिखकर मैं शब्दों में तिरोहित कर जाऊं । सोच विचारों की शक्ति जब कुछ उथल पुथल सा करती हो । उन भावों को गढ़कर मैं अपनी बात सुना जाऊँ । जो दिखता है आसपास मन उससे उद्वेलित होता है । उन भावों को साक्ष्य रूप दे मैं कविता सी कह जाऊं । Location । delhi  । India । BLOG 1 बिखरे मोती । 2 गीत मेरे अनुभूतियाँ
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