14 February 2011

मैं रजनी हूँ । ब्ला..परिचय । 6

लगभग 8 साल के गैप के बाद । जब मैं दोबारा इंटरनेट से गत मार्च में जुङा । और ब्लाग देखते हुये जिस एक कवियत्री के ब्लाग पर अपलक रह गया । वो शायरा किसी उदास विरहनि की तरह दीवाल का कोना देख रही थी । खैर..इस झटके के बाद । जब उनकी रचनाओं को देखा । तो मेरी जिन्दगी के अतीत के पन्नों से..एक असफ़ल प्रेम कहानी की नायिका..सामने आकर खङी हो गयी । और इस तरह यह रजनी जी से मेरा पहला परिचय था । (..यहाँ स्थान कम होने से मेरी शेष बात कृपया कमेंट में देखें । ) आईये देखें । प्रेमियों के विरह । कसक । चाहत को अपने गीतों में हूबहू व्यक्त करने वालीं रजनी जी अपने बारे में क्या बता रही हैं ।
हजार रश्मियों से अकेली लड़ रही..मैं रजनी हूँ । पर मन का अँधेरा हर रही मैं ।..मैं रजनी मल्होत्रा विवाह के बाद नैय्यर झारखण्ड के बोकारो थर्मल से । मेरी शिक्षा झारखण्ड एवं UP में पूरी हुई । इतिहास ( प्रतिष्ठा ) से B.A संगणक विज्ञान में BCA एवं हिंदी से B Ed इलाहाबाद से..। मैं संगणक विज्ञान की शिक्षिका हूँ..। एक कवियत्री । शायरा । लेखिका । मेरा लालन पालन झारखण्ड के रांची में । विवाह के बाद बोकारो थर्मल में हूँ । अभी रांची के इग्नू से हिंदी से M.A कर रही । मैं फेसबुक तथा ऑरकुट पर भी हूँ । रजनी मल्होत्रा नैय्यर । Location । बोकारो थर्मल । रांची झारखण्ड । BLOG..रजनी नैय्यर मल्होत्रा मेरे मन की उलझन शायरी मेरी कलम से । नारी बेबसी मेरे मन की उलझन

17 comments:

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

अपने जीवन के जिन मधुर पलों को मैंने बमुश्किल भुलाया था । वो रजनी जी के विरह गीतों से फ़िर जीवन्त हो उठे । इसके बाद मैंने इनकी सभी रचनाओं को देखा । जो किसी प्रेमिका की अपने प्रेमी के लिये लिखी डायरी या प्रेम पत्रों की दिली अनुभूति कराते थे । और किसी को भी अपनी मुहब्बत के दिन याद दिलाने के लिये विवश कर देते थे ।..इस तरह इस ब्लाग जगत में मेरा " सर्वप्रथम परिचय " जिन .. कवियत्री । शायरा । लेखिका । से एक कवियत्री और एक पाठक के तौर पर हुआ । वे सुश्री रजनी नय्यर मल्होत्रा ही थीं ।

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

कल के ब्लागर परिचय में सुश्री रश्मिप्रभा जी के बारे में लिखते समय..( वास्तव में जिसे बचपन से.. ) .. और.. ( उसके बारे में कुछ भी कहने..) मैंने " जिसे और उसके " शब्द का प्रयोग किया । ..और कल से ही लगातार सोचने के बाद भी मैं यह तय नहीं कर पाया कि मेरे द्वारा लिखे गये ये शब्द कहीं अनुचित तो नहीं हो गये ?? अगर ये अग्यानता से अनुचित लिख गये हों । तो मुझे बेहद खेद है ।..पर मुझे ऐसा भी लगता है कि लेख के उस स्थान पर इसी तरह लिखा जायेगा । क्योंकि मैंने शीर्षक में । रश्मिप्रभा । ही लिखा । जबकि लेख में नाम के आगे जी लगा है । जो कि मेरे ख्याल से पूरी तरह उचित है । कृपया इस बिंदु पर भी अपने विचार बतायें ।

संजय भास्कर said...

@ rajni nayar malhotra ji se mil kar khusi hui
rajnai meri badi bahan hai
bahumukhi partibha ki hai dhani rajni ji
...........mujhe hamesha se hi rajni didi ne bahut kuch sikhaya hai

main to dhanya ho gya ranji didi jaisi bahan pa kar

संजय भास्कर said...

ranji ji bahut hi achi lekhika hai aur bahu hi achi insaan bhi hai

रश्मि प्रभा... said...

रजनी जी को पढ़ना हमेशा विचारोत्तेजक होता है... बधाई आपको उनके परिचय को स्थान देने के लिए और रजनी जी को बधाई

दर्शन कौर धनोए said...

रजनी जी, से मेरा परिचय आज ही हुआ हे उन्हें ढेरो शुभकामनाए |

सदा said...

रजनी जी से मेरा यह प्रथम परिचय है ..आपके बारे में जानकर अच्‍छा लगा ...प्रस्‍तुति के लिये आभार ।

ZEAL said...

Rajni ji is a wonderful poetess . Thanks for the introduction .

शिखा कौशिक said...

bahut achcha prichay karaya hai aapne Rajni ji se .badhai .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

रजनी जी से परिचय अच्छा लगा ..

सुशील बाकलीवाल said...

आभार रजनीजी से परिचय करवाने के लिये.

Patali-The-Village said...

रजनी जी से परिचय करवाना बहुत अच्छा लगा| धन्यवाद|

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

mafi chahungi rajiv ji..
kafi der se mera aana hua ... aaj net aankhmichauli khel raha koi bhi kaam sahi dhang se nahi kar pa rahi...........aap sabhi ko mera hardik naman .aur rajiv ko bhi fir se aabhar mujhe yaha lane ke liye...

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