19 February 2011

ब्लाग मूँछ । ललित शर्मा । पोस्ट 11 ।

मूँछें हो तो ललित शर्मा जैसी..वरना ना हो । जब भी मैं इनको देखता हूँ । मेरा ध्यान इनके फ़ोटवा पर कम मोंछवा पर ज्यादा जाता है । अपनी संक्षिप्त चुटीली अनेकार्थी मगर सारगर्भित टिप्पणियों और यात्रा  वृतांत , मिलन वृतांत आदि को बेहद रोचकता से पेश करने वाले श्री ललित शर्मा जी मिलनसारिता आदि अपने तमाम गुणों के साथ ब्लाग जगत की मूँछ ( शान ) ही हैं । अगर आपने इनका " अबाउट मी " परिचय कभी ध्यान से पढा हो । तो ये परिचय ही बहुत कुछ बयान करता है । अगर नहीं पढा । तो अब पढ लीजिये.." परिचय क्या दूँ मैं तो अपना । नेह भरी जल की बदरी हूँ । किसी पथिक की प्यास बुझाने । कुँए पर बंधी हुई गगरी हूँ । मीत बनाने जग मे आया । मानवता का सजग प्रहरी हूँ । हर द्वार खुला जिसके घर का । सबका स्वागत करती नगरी हूँ । " Occupation । शिक्षा । Location । अभनपुर । छत्तीसगढ़ । India । BLOG..ललितवाणी । अङहा के गोठ । शिल्पकार के मुख से । ललित डाट काम

5 comments:

रश्मि प्रभा... said...

shubhkamnayen

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

ललित जी और उनकी मूंछों से परिचय बढ़िया रहा :):)

Kailash C Sharma said...

ललित जी के व्यक्तित्व से परिचय कराने के लिए धन्यवाद..

Dr (Miss) Sharad Singh said...

वाह...! दिलचस्प...!
मूंछोंवाला दबंग हो तो आप जैसा....(गुस्ताखी मुआफ करें)

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

Lalit ji ka parichay karaya achha laga ....

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